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चारधाम यात्रा 2026

महत्वपूर्ण जानकारी सभी भारत वासियों के लिए चारधाम यात्रा   2026

इस बार चारधाम यात्रा 2026 में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शासन की ओर से विशेष व्यवस्था की गयी है सभी श्रद्धालुओं को निर्देश दिये गये हैं, कि यात्रा के दौरान उनके पास पहचान पत्र हो तथा सभी श्रद्धालुओं को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है, जनपद हरिद्वार में पार्किंग स्थलों की जानकारी एवं चारधाम सम्बन्धी यातायात व्यवस्था व दिशा-निर्देश हेतु QR कोड सभी श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराया गया है। ‘हरिद्वार’ (हरि का द्वार)उत्तराखण्ड का प्रसिद्ध धार्मिक नगर है। मुख्यत: चारधाम यात्रा हरिद्वार से प्रारम्भ होती है यह नगर हिन्दुओं की धार्मिक आस्था का प्रमुख केन्द्र है। संपूर्ण हरिद्वार में सिद्धपीठ, शक्तिपीठ और अनेक नए पुराने मंदिर बने हुए हैं। हर की पौड़ी, मनसा देवी मंदिर, दक्षेश्वर महादेव मंदिर, सुरेश्वरी मंदिर आदि ।

चंडी देवी मंदिर

उत्तराखंड के सबसे पवित्र नगरी कहे जाने वाली हरिद्वार में मंदिरों की कोई कमी नहीं है। लेकिन यहां का चंडी देवी मंदिर सबसे प्राचीन व सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि माता का यह मंदिर करीब 1200 साल पुराना है। सभी प्रसिद्ध मंदिरों की तरह ही इस मंदिर की भी अपनी एक पौराणिक मान्यता है। माता का मंदिर भक्तों के लिए सुबह 06:00 बजे से रात के 09:00 बजे तक खुला रहता है। इस बीच मंदिर दोपहर 12:00 बजे से लेकर 02:00 बजे बंद भी रहता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब दानवों के राजा शुम्भ और निशुम्भ देवताओं पर काफी अत्याचार करने लगे थे और स्वर्ग लोक पर कब्जा जमाना चाहते थे, तब माता पार्वती के तेज से चंडिका देवी का उदय हुआ था। उस समय माता चंडिका ने इसी स्थान पर दोनों राक्षसों का वध किया था और कुछ समय विश्राम भी किया था। इसी कारणवश इस पहाड़ी पर माता का मंदिर बना, जिसे वर्तमान समय में देशभर के लोग जानते हैं और माता के मंदिर में अपना शीष नवाने आते हैं।

मनसा देवी

यह मंदिर, जिसे बिल्वा तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है, हरिद्वार के पंच तीर्थों में से एक है। यह मंदिर शक्ति के एक रूप मनसा देवी के पवित्र निवास के रूप में जाना जाता है और कहा जाता है कि यह भगवान शिव के मन से उत्पन्न हुआ था। मनसा को नाग वासुकि की बहन माना जाता है। उन्हें मानव अवतार में भगवान शिव की बेटी भी माना जाता है। कहते हैं कि मनसा देवी भगवान शिव की मानस पुत्री है इसीलिए उन्हें मनसा कहते हैं। परंतु कई पुरातन धार्मिक ग्रंथों में इनका जन्म कश्यप के मस्तक से हुआ हैं इसीलिए मनसा कहा जाता है। यह भी कहा जाता है कि यहां पर माता सती का मन गिरा था इसलिए यह स्थान मनसा नाम से प्रसिद्ध हुआ। हरिद्वार शहर में शक्ति त्रिकोण है।

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